Know What Is Punsavan Sanskar And Why It Is Important

4,390 views · Published 4 May 2014 · 22:48 · Indexed 20 September 2026

Channel: Astro Vastu Remedies · 2014 · Science & Technology

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जानिए क्या है पुंसवन संस्कार और क्यों आवश्यक है यह संस्कार 

हिन्दू धर्म में, संस्कार परम्परा के अंतर्गत भावी माता-पिता को यह तथ्य समझाए जाते हैं कि शारीरिक, मानसिक दृष्टि से परिपक्व हो जाने के बाद, समाज को श्रेष्ठ, तेजस्वी नई पीढ़ी देने के संकल्प के साथ ही संतान पैदा करने की पहल करें । गर्भ ठहर जाने पर भावी माता के आहार, आचार, व्यवहार, चिंतन, भाव सभी को उत्तम और संतुलित बनाने का प्रयास किया जाय । उसके लिए अनुकूल वातवरण भी निर्मित किया जाय । गर्भ के तीसरे माह में विधिवत पुंसवन संस्कार सम्पन्न कराया जाय, क्योंकि इस समय तक गर्भस्थ शिशु के विचार तंत्र का विकास प्रारंभ हो जाता है । वेद मंत्रों, यज्ञीय वातावरण एवं संस्कार सूत्रों की प्रेरणाओं से शिशु के मानस पर तो श्रेष्ठ प्रभाव पड़ता ही है, अभिभावकों और परिजनों को भी यह प्रेरणा मिलती है कि भावी माँ के लिए श्रेष्ठ मनःस्थिति और परिस्थितियाँ कैसे विकसित की जाए ।हि न्दू धर्म में, संस्कार परम्परा के अंतर्गत भावी माता-पिता को यह तथ्य समझाए जाते हैं कि शारीरिक, मानसिक दृष्टि से परिपक्व हो जाने के बाद, समाज को श्रेष्ठ, तेजस्वी नई पीढ़ी देने के संकल्प के साथ ही संतान पैदा करने की पहल करें । 

Brahaspati says that the rite should be performed before the baby begins to grow and move in the womb. The word Punsvana occurs in Atharvaveda, where it is used in the literal sense of "giving birth to a male child:. The word "male means soul. The Punsavana is used for welcoming the great sould. This is also called "Garbharakshan". Garbharakshana is performed to assure that the infant is not miscarried.

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