Prof. Varun Arya At Patanjali Yogpeeth Haridwar
1,226 views · Published 2 January 2013 · 14:09 · Indexed 20 September 2026
Channel: Bharat Swabhiman · 2013 · Nonprofits & Activism
आज गांव गांव में इतना शोषण होता हैं रोजाना बलत्कार होते हैं उससे देश तो क्या गांव भी जागृत नही हो पाता इतना शोषण होता हैं दलितों का शोषण होता हैं राजस्थान में आज भी दलित जब घोड़े पर सवार होकर शादी के लिये जाता हैं आये दिन अखबार में पढ़ते हैं कि उसको उतार के गधे पर बैठा दिया जाता हैं आज भी बाल विवाह होता हैं बच्ची कुछ समझ नही पति हैं उसके पहले उसको डोर बांध दिया जाता हैं तो ज्ञान और विज्ञान के द्वारा लोगो में जाग्रति लाये की कब किसका समस्या हो सकती हैं कैसे क्या हो सकता हैं एक अंग्रेजी में कहावत हैं की आप एक रोटी दो लेकिन व्यक्ति को कमाना सिखाओ तो जीवन भर का भोजन देते हैं लोगो को पाने अधिकारों के प्रति लड़ना सिखाओ उनको ज्ञान दो पढना लिखना सिर्फ ज्ञान नही हैं अपने अधिकारों के लड़ने के लिए सक्षम बनना काबिल बनना वह ज्ञान हैं हर चीज का मापदंड होता हैं हमने कहाँ बुखार हो गया तुरंत थर्मामीटर लिया जाता हैं और नापते हैं की कितना बुखार हैं विकाश का भी मापदंड होना चाहिये और स्वामी जी के परिपेक्ष में चार मापदंड हैं इसलिए हम जो भी करे उन चार मापदंड में हम उसको आंके नापे और मांपे पहला मापदंड हैं देश का विकाश हो दूसरा गरीब से गरीब तक वह विकाश पहुचे तीसरा विकाश महसूस हो हो रहा हैं पहुँच रहा हैं अगर महसूस नही हो रहा हैं तो कोई फायदा नही हैं विकाश हो विकाश महसूस हो और विकाश पहुंचे और चौथा स्वामी जी के परिपेक्ष में की स्वामी जी की पतंजलि की यश प्रतिष्ठा में बढ़ोतरी हो इसलिए जो भी किया जाये इन चार मापदंड में उसे देखा जाये की वह खरा उतरा हैं की नही जैसा की स्वामी जी ने बताया की मैं तो एक प्रबन्धन का विधार्थी हूँ और मुझे काफी चीज सिखाई गयी उसमे से एक ये सिखाया गया की जिन्दगी में किसी चीज में घुसो मत और घुसो तो मंजिल तक ले जाओ इस तरह से हमने संघर्ष किया मंजिलो तक पहुंचे उसमे से एक मैं जिक्र करना चाहूँगा एक सपना लिया था जब अमेरिका की एक बड़ी कंपनी में महाप्रबंधक था आज से 13 साल पहले उसे दिपोंड कहते हैं दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी हम सब कुछ जीवन में कुछ भी करते उसका एक उदेश्य होता हैं की अपने आप को संतुष्टि मिले अपने परिवार को संतुष्टि मिले लोग कहेंगे की संतुष्टि का मापदंड क्या हैं मैंने बोला हर चीज का मापदंड होना चाहिये संतुष्टि का मापदंड हैं की जब हम रात को बिस्तर पर लेटे तो बहुत बढिया नींद आवे और कुछ मापदंड नही हैं कितने आमिर आमिर लोग बहुत बहुत बड़े बंगलो में रहते हैं कितनी सारी गाड़ियाँ होती हैं बहुत पैसा होता हैं नौकर होते हैं सोना चांदी के बर्तन में खाना खाते हैं रात को एयरकंडीसन कमरे में सोते हैं पर नींद नही आती हैं गोली लेते हैं सोने की फिरभी नींद नही आती हैं उनके पास सब कुछ हैं लेकिन संतुष्टि नही हैं संतुष्टि नही तो कुछ भी नही संतुष्टि होना बहुत जरुरी हैं जब एक मैनेजमेंट का विधार्थी अपना कैरियर चालू करता हैं जो की गरीब परिवार से था तो इच्छा होती हैं की पैसा कमाया जाये पैसा कमाने के बाद फिर पैसा संतुष्टि नही देता हैं फिर अपने आपको टटोला की अब क्या संतुष्टि देगा लोग कितनी बार कहते हैं की मैं बच्चो के लिए कमा रहा हूँ मैं बच्चो के लिए नही कमाना चाहता था क्योकि बच्चो की वैशाखी नही बनना चाहता था बच्चो को पैरो में खड़ा करना चाहता था माता पिता का फर्ज हैं की बच्चो को अच्छा इन्सान बनावे उनको अपने पैरो में खड़ा होना सिखावे उन्हें अच्छी सिक्षा दिलावे उन्हें सक्षम बनावे लेकिन उनके लिए पैसा कमाके उनको वैशाखी न थमावे मैं अपने बच्चो को सक्षम बनाना चाहता था फिर मैंने अपने को टटोला तो पाया की मुझे शिक्षा की छेत्र में कुछ करना चाहिए बात को छोटी करके उस मुद्दे पर आता हूँ तो अज कुछ भी करना चाहते हैं तो पतंजलि भी हैं उसके लिए जमीन की आवश्यकता होती हैं जो भी करेंगे अच्छा करेंगे सही तरीके से करेंगे कुछ लोग सही काम गलत तरीके से भी करते हैं सही काम सही तरीके से करना चाहिए सरकार ने बोला था जमीन देंगे बात टेबल के नीचे चली गयी हम टेबल के उपर रहने वाले लोग हैं बात बनी नही तो प्राइवेट जमीन खरीदी प्राइवेट जमीं में भी ब्लैक और वाइट होता हैं तो हमने बोला की हम तो पूरा वाइट में ही लेंगे तो हमको जो जमीन मिली ऐसी जमीन थी जिसे कोई खरीदने को तैयार नही था सबसे बंजर जमीन जमीन कैसी भी हो आप उसपे जब तक भवन निर्माण नही कर सकते जब तक की उसका रूपांतरण नही होता एक कागज का टुकड़ा होता हैं रुपान्तरण उसके लिये भी मामला टेबल के नीचे आ गया निर्माण तो करना था कैम्पस का सब कुछ कोशिश किया कुछ नही हुआ This is Video of Varun Arya about Vision for Nation Building in Patanjali Yogpeeth Phase 2 Haridwar