Religious Importance, Story Of Bhairavashtmi, Kala-Bhairava Ashtami, भैरव-अष्टमी, भैरव-जयंती

2,675 views · Published 25 November 2013 · 23:08 · Indexed 20 September 2026

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Religious Importance, Story Of Bhairavashtmi, Kala-Bhairava Ashtami, भैरव-अष्टमी, भैरव-जयंती का महत्व।

कालभैरव - भगवान् शंकर के पूर्णावतार.....

मार्गशीर्ष कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन मध्याह्न-काल में भगवान् काल-भैरव का अवतरण हुआ था । अतः इस दिन भैरव-जयंती मनाई जाती है । शिव-पुराण, शतरुद्र-संहिता, अध्याय 8 के अनुसार भगवान शंकर ने इसी अष्टमी को ब्रह्मा के अहंकार को नष्ट किया था, इसलिए यह दिन 'भैरव-जयंती ' व्रत के रूप में मनाया जाने लगा। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं।इस दिन प्रत्येक प्रहर में काल भैरव और ईशान नाम के शिव की पूजा और अर्घ्य देने का विधान है । आधी रात के बाद काल भैरव की पूजा-अर्चना की जाती है। इसके बाद पूरी रात का जागरण किया जाता है।मान्यता है कि भगवान भैरव का वाहन कुत्ता है । इसलिए इस दिन कुत्ते (विशेषतया काले रंग का) की भी पूजा की जाती है । इस व्रत की कथा का उल्लेख शिव पुराण में विस्तार से आया है। भैरव भगवान शिव के दूसरे रूप में माने गए हैं। मान्यता है कि इसी दिन दोपहर के समय शिव के प्रिय गण भैरवनाथ का जन्म हुआ था। कहा जाता है कि भैरव से काल भी भयभीत रहता है, इसलिए उन्हें कालभैरव भी कहते हैं। देश में भैरव जी के कई मंदिर हैं, जिनमें काशी स्थित कालभैरव मंदिर काफी प्रसिद्ध है। जिन्हे कशी का कोतवाल कहा जाता है ।

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